Price Today : -Gold-1,30.860--22 -carat-10 gm/10g
Price Today : Silver1,90,000 per kg/1kg
वन

अजय की सफलता छत्तीसगढ़ के वनाश्रित परिवारों के अटूट विश्वास की जीत है" - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

वनांचल के सपनों को मिली नई उड़ानतेंदूपत्ता संग्राहक के बेटे अजय गुप्ता बने भारतीय वन सेवा के अधिकारी

 

रायपुर, 09 मई 2026/ छत्तीसगढ़ के जंगलों से निकली एक प्रतिभा ने आज देश की सर्वाेच्च सेवाओं में अपनी जगह बनाकर प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है। रायगढ जिले के सम्बलपुरी ग्राम के एक साधारण तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार के सुपुत्र अजय गुप्ता ने अपने अटूट संकल्प से भारतीय वन सेवा (IFS) में चयनित होकर यह सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा संसाधनों की नहींबल्कि कड़े संघर्ष और सही मार्गदर्शन की मोहताज होती है।

 

 संबलपुरी गांव में तेंदूपत्ता और महुआ बीनने वाला अजय गुप्ता अब IFS अधिकारी बन गया है। कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई करते हुए अजय ने पूरे देश में 91वीं रैंक हासिल की। अब वही जंगलजो कभी परिवार की रोजी-रोटी थाउसकी जिम्मेदारी बनने जा रहा है। अजय गुप्ता ने 12वीं कक्षा में भी शानदार प्रदर्शन किया और इसके बाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में प्रवेश मिला। एनआईटी में पढ़ाई के दौरान भी उन्हें तीन वर्षों तक छात्रवृत्ति मिलती रही। अजय कहते हैं कि पहले सपने बहुत बड़े नहीं थे। लगता था कि हमारी दुनिया बस गांव तक सीमित हैलेकिन एनआईटी में एडमिशन लेने के बाद नजरिया बदल गया। पहली बार लगा कि मैं भी कुछ बड़ा कर सकता हूं। अजय कहते हैं कि जंगल उनके बचपन से ही जिंदगी का हिस्सा रहा है। जंगल ने उन्हें सिर्फ रोजगार नहीं दियाबल्कि जीवन की दिशा भी दी। वह कहते हैं बचपन से मेरा जुड़ाव जंगल से रहा है। जंगल ने मुझे बहुत कुछ दिया हैबस्तर में काम करने के दौरान भी जंगल से रिश्ता और मजबूत हुआ।

 

संघर्ष की जमीन से सफलता के आसमान तक

 

अजय का बचपन जंगलों के बीच वनोपज संग्रहण और खेती-किसानी करते हुए बीता। संघर्ष के दिनों को याद करते हुए अजय बताते हैं। माता-पिता अधिक शिक्षित नहीं थेलेकिन उन्होंने बच्चों की शिक्षा को ही अपना लक्ष्य माना। छुट्टियों के दौरान अजय स्वयं जंगलों में जाकर तेंदूपत्ता और महुआ इकट्ठा करने में माता-पिता की मदद करते थे। अभावों के बीच भी उन्होंने 10वीं में 92.66 प्रतिशत और 12वीं में 91.40 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी योग्यता का परिचय दिया था।

सरकारी योजनाओं ने पंखों को दी मजबूती

अजय की इस लंबी उड़ान में छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं ने 'कैशलेस सपोर्टऔर आर्थिक संबल प्रदान किया। लघु वनोपज संघ की छात्रवृत्ति ने स्कूल से कॉलेज तक की पढ़ाई के दौरान इस छात्रवृत्ति ने आर्थिक बोझ को कम किया। राज्य शासन की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना से उन्हें निरंतर वित्तीय सहायता मिलीजिससे वे अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर सके।