लाखटकिया गोल्ड से गोल्ड व्यापारी खुश उपभोक्ता में भरी निराशा सोने से मोह भांग
रायपुर /// आज गोल्ड ने एक लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के हिसाब से अपना मूल्य छू लिया है ज्यादा दिन नहीं हुए हैं स्वर्ण और चांदी में इतनी तेजी से मूल वृद्धि हो रही है की दोनों धातु आम आदमी के पहुंच से बाहर हो गई हें शादी में सोना, चांदी का आदान प्रदान करना बड़ा ही आकर्षण रस्म होती थी कुछ सट्टा बाजों ने और नंबर दो धन कुबेरों ने गोल्ड की बेतहाशा खरीदी कर बहुमूल्य धातु को आम जनता की पहुंच से बाहर कर दिया है गोल्ड का क्रेज सबसे ज्यादा एशिया के लोगों में होता है वह गोल्ड को पूंजी के रूप में भी देखते हैं महिलाएं श्रृंगार के रूप में देखती हैं वह भी एक पूंजी की तरह ही होता है लेकिन बाकी दुनिया में गोल्ड की कोई कीमत नहीं वहां के लोग ना तो इस पर पैसा खर्च करते हैं और ना ही इसका संग्रह करते हैं ,
जिस तरीके से गोल्ड ने भारत में ₹100000 प्रति 10 ग्राम के हिसाब से अपना रिकॉर्ड कायम किया है इस पर सरकार को नियंत्रण करना चाहिए और इसकी जांच करना चाहिए कि यह बेतहाशा वृद्धि कैसे हो रही है इस वृद्धि के पीछे कौन लोग हैं जो गोल्ड माफिया की तरह काम करके आम जनता की जेब से बच्चा कुछ धन भी अपनी तिजोरी में भरने के लिए तैयार है
आम बाजार में पूछने पर पता चला कि अचानक इस गोल्ड की कीमत इतनी क्यों बढ़ रही है गोल्ड व्यापारी भी इसका सही सही जवाब नहीं दे पा रहे उनका जवाब है की इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड की कीमत बढ़ जाने से यह स्थिति बनी है पर वास्तविकता यह है कि इंटरनेशनल गोल्ड मार्केट वैल्यू सरकार अपने खजाने के लिए उपयोग करती है जनता से इस मूल्य का कोई लेना-देना नहीं है गोल्ड माफिया ने इस पैमाने का उपयोग आम जनता के लिए कर दिया है इसका खामियाजा आम उपभोक्ता भोग रहा हे बात साफ है कि जब वस्तु का शॉर्टेज हो और खरीददार अधिक हों तो बाजार में तेजी आना बाजार की स्वाभाविक प्रक्रिया है लेकिन ना तो गोल्ड की कमी है ना अचानक गोल्ड के खरीदार बढ़े हैं फिर भी इस गोल्ड सट्टा बाजार में बेतहाशा मूल वृद्धि यह बतलाती है कि इसके पीछे जो माफिया है वह इस धातु को बाजार में अपनी वैल्यू बढ़ाने के लिए उपयोग कर रहा है सरकार को इसकी जांच कर यह आम जनता कोबतलाना चाहिए कि वास्तव में गोल्ड की कीमत क्यों बढ़ रही है
1925 to 2025 last 100 years Fine Gold Rate variation for 10 grams
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1925. 18.75
1926. 18.43
1927. 18.37
1928. 18.37
1929. 18.43
1930. 18.05
1931. 18.18
1932. 23.06
1933. 25.05
1934. 28.81
1935. 30.81
1936. 29.81
1937. 30.18
1938. 29.93
1939. 31.75
1940. 36.05
1941. 37.43
1942. 44.05
1943. 51.05
1944. 52.93
1945. 62.00
1946. 83.87
1947. 88.62
1948. 95.87
1949. 96.18
1950. 97.18
1951. 98.00
1952. 76.81
1953. 73.00
1954. 77.00
1955. 79.00
1956. 90.00
1957. 90.00
1958. 95.00
1959. 102.00
1960. 111.00
1961. 119.00
1962. 119.00
1963. 97.00
1964. 63.00
1965. 72.00
1966. 84.00
1967. 102.00
1968. 162.00
1969. 176.00
1970. 184.00
1971. 193.00
1972. 202.00
1973. 278.00
1974. 506.00
1975. 540.00
1976. 572.00
1977. 576.00
1978. 685.00
1979. 937.00
1980. 1330.00
1981. 1700.00
1982. 1645.00
1983. 1800.00
1984. 1970.00
1985. 2130.00
1986. 2140.00
1987. 2570.00
1988. 3130.00
1989. 3140.00
1990. 3200.00
1991. 3466.00
1992. 4334.00
1993. 4140.00
1994. 4598.00
1995. 4680.00
1996. 5160.00
1997. 4725.00
1998. 4045.00
1999. 4680.00
2000. 4400.00
2001. 4300.00
2002. 5000.00
2003. 5600.00
2004. 5850.00
2005. 7000.00
2006. 8400.00
2007. 10800.00
2008. 12500.00
2009. 14500.00
2010. 18500.00
2011. 26400.00
2012. 29500.00
2013. 29600.00
2014. 28734.00
2015. 26845.00
2016. 29560.00
2017. 29920.00
2018. 31730.00
2019. 36080.00
2020. 48480.00
2021. 50000.00
2022. 53000.00
2023. 60000.00
2024. 80000.00
2025. 100000.00



