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रायपुर

कलिंगा विश्वविद्यालय में ज्ञान के स्तंभों का जश्न सर्वश्रेष्ठ उच्च शिक्षा संस्थान शिक्षक पुरस्कार 2025

रायपुर, 12 मई 2025   /// नया रायपुर में स्थित कलिंगा विश्वविद्यालय एक प्रतिष्ठित संस्थान है जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने और समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। शैक्षणिक उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता और शोध एवं नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने के साथविश्वविद्यालय पिछले 3 वर्षों से लगातार एनआईआरएफ रैंकिंग के अनुसार देश के शीर्ष 101-150 संस्थानों में स्थान बना रहा है।

उच्च शिक्षा संस्थान पुरस्कार उच्च शिक्षा में नेतृत्वकर्ता/शिक्षक के रूप में अपनी उपलब्धियों के लिए व्यक्तियों को सम्मानित और सम्मानित करते हैं। 

कलिंगा विश्वविद्यालय ने हाल ही में सर्वश्रेष्ठ उच्च शिक्षा शिक्षक पुरस्कार 2025 का आयोजन कियाजो छत्तीसगढ़ भर में उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों के अनुकरणीय योगदान को मान्यता देने की एक पहल है। इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम का उद्देश्य शैक्षणिक और अनुसंधान गतिविधियों में नवाचारसमर्पण और उत्कृष्टता को मान्यता देना था। सरकारी कॉलेजोंनिजी कॉलेजोंराज्य और केंद्र सरकार के विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों और राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों से नामांकन प्राप्त हुए। पैनल को कुल मिलाकर 200 से अधिक पंजीकरण प्राप्त हुए। कार्यक्रम का शुभारम्भ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन समारोह से हुआजो ज्ञान और आत्मज्ञान का प्रतीक है। प्रतिभागियों का पारंपरिक तिलक और गुलाब के साथ स्वागत किया गया।

कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. संदीप गांधी ने स्वागत भाषण दिया और एक आकर्षक पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन (पीपीटी) के माध्यम से विश्वविद्यालय पर बहुमूल्य जानकारी साझा की। कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर. श्रीधर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में उन्नत शिक्षण कौशल’ विषय पर एक सत्र के माध्यम से अपना दृष्टिकोण साझा किया। डॉ. सुनयना शुक्लाउप प्रबंधककैरियर और कॉर्पोरेट संसाधन केंद्र (सीसीआरसी) ने भावनात्मक बुद्धिमत्ता पर एक सत्र लिया।

25000 रुपये का प्रथम पुरस्कार राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी)रायपुर में कंप्यूटर विज्ञान इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ दिलीप सिंह सिसोदिया को दिया गया। 15000 रुपये का दूसरा पुरस्कार डॉ. प्याली चटर्जीएसोसिएट प्रोफेसर और विभागाध्यक्षविधि संकायआईसीएफएआई विश्वविद्यालयरायपुर को दिया गया। डॉ. शैलेश एम. देशमुखएसोसिएट प्रोफेसरइलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभागमैट्स विश्वविद्यालयरायपुर को स्मृति चिन्ह के साथ 10,000 रुपये का तीसरा पुरस्कार प्रदान किया गया। 

‘‘श्रेष्ठता योग्य शिक्षक’ पुरस्कार से पांच प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया - डॉ. ज्योति वर्मासहायक प्राध्यापकशिक्षा विभागगुरु घासीदास विश्वविद्यालयबिलासपुरडॉ. मनीष वर्माप्रोफेसरअंग्रेजी विभागश्री दावरा विश्वविद्यालयनया रायपुरश्री क्रांति कुमार देवांगनविभागाध्यक्षकंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग विभागएमिटी यूनिवर्सिटीरायपुरडॉ. श्रद्धा नेटीएसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्षपशु चिकित्सा औषध विज्ञान एवं विष विज्ञान विभागपशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालयदुर्ग और डॉ. किरण बाला पटेलप्रिंसिपलगीतांजलि टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेजमुर्शिदाबादपश्चिम बंगाल को 5,000/- रुपये प्रत्येक से सम्मानित किया गया। 

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अन्य सभी प्रतिभागियों को उनकी अब तक की शिक्षण यात्रा की सराहना के लिए स्मृति चिन्ह के साथ-साथ भागीदारी प्रमाण पत्र भी दिए गए। मूल्यांकन के मापदंड थे - राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में पेपर प्रस्तुतिप्रकाशित शोध पत्रस्वयं/एनपीटीईएल पाठ्यक्रम का समापनकार्यकाल के दौरान पेटेंट प्रकाशनप्रकाशित पुस्तकेंअनुसंधान अनुदान और वित्त पोषित परियोजना प्रकाशन तथा सरकार या सरकारी मान्यता प्राप्त निकायों द्वारा शैक्षणिक/अनुसंधान पुरस्कार की प्राप्ति। निर्णायक मंडल के सदस्य थे डॉ. राहुल मिश्राडीन अकादमिक मामले और परीक्षा नियंत्रकडॉ. विजयलक्ष्मी बिरादरनिदेशक- आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) और डॉ. आर. उदय कुमारनिदेशक- बौद्धिक संपदा अधिकार प्रकोष्ठ (आईपीआर)। 

इस पहल के माध्यम से, कलिंगा विश्वविद्यालय ने पूरे भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों के अनुकरणीय योगदान को मान्यता दी। इस कार्यक्रम का आयोजन और क्रियान्वयन कलिंगा विश्वविद्यालय के मार्केटिंग विभाग द्वारा किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रवेश निदेशक श्री अभिषेक शर्मा ने की। श्री जे विशालसुश्री नैनासुश्री सिमरनश्री जगदीशश्री प्रांजलसुश्री दिव्यासुश्री आकांक्षा दुबे और सुश्री रुद्राणी आचार्य ने कार्यक्रम का सफल संचालन सुनिश्चित किया।

समारोह की मुख्य अतिथि वाणिज्य एवं प्रबंधन संकाय की सहायक प्रोफेसर डॉ. दीप्ति पटनायक और   डॉ. निष्ठा शर्मा रहीं। कार्यक्रम का समापन बीबीए चतुर्थ सेमेस्टर की छात्रा सुश्री रुद्राणी आचार्य के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।