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राष्ट्रीय

मेरे जीवन को गढ़ने में छत्तीसगढ़ के लोगों का, यहां की भूमि का बहुत बड़ा आशीर्वाद रहा है >> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

**** आज का दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है ये केवल एक इमारत का समारोह नहींबल्कि 25 वर्षों की जन-आकांक्षाजन-संघर्ष और जन-गौरव   ***

रायपुर 01/11/2025 ///  छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमन डेका जीलोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जीछत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्षमेरे मित्र रमन सिंह जीप्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जीकेंद्र सरकार में मेरे सहयोगी मंत्री तोखन साहू जीउपमुख्यमंत्री विजय शर्मा जीअरुण साव जीराज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत जीउपस्थित अन्य मंत्रीगणजनप्रतिनिधिगण और मौजूद देवियों और सज्जनों!

छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा के लिएआज का दिन एक स्वर्णिम शुरुआत का दिन है। और मेरे लिए व्यक्तिगत तौर पर ये बहुत ही सुखद दिन हैअहम दिन है। मेरा बीते कई दशकों से इस भूमि से बहुत आत्मीय नाता रहा है। एक कार्यकर्ता के रूप में मैंने छत्तीसगढ़ में बहुत समय बितायायहां से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला। मेरे जीवन को गढ़ने में यहां के लोगों कायहां की भूमि का बहुत बड़ा आशीर्वाद रहा है।  छत्तीसगढ़ की परिकल्पनाइसके निर्माण का संकल्प और फिर उस संकल्प की सिद्धि, हर एक क्षण पर मैं छत्तीसगढ़ के परिवर्तन का साक्षी रहा हूं। और आज जब छत्तीसगढ़ 25 वर्षों की यात्रा के अहम पड़ाव पर पहुंचा हैतो मुझे इस क्षण का भीसहभागी बनने का अवसर मिला है। आज इस रजत जयंती के उत्सव परमुझे राज्य के लोगों के लिएइस नई विधानसभा के लोकार्पण करने का सौभाग्य मिला है। मैं छत्तीसगढ़ के लोगों कोराज्य सरकार कोइस अवसर पर अपनी शुभकामनाएं देता हूंबधाई देता हूं।

साथियों,

2025 का ये वर्ष भारतीय गणतंत्र का अमृत वर्ष भी है। 75 वर्ष पहले भारत ने अपना संविधान देशवासियों को समर्पित किया था। ऐसे मेंआज इस ऐतिहासिक अवसर पर मैं इस अंचल से संविधान सभा के सदस्य रहेरविशंकर शुक्ल जीबैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल जीघनश्याम सिंह गुप्त जीकिशोरी मोहन त्रिपाठी जीरामप्रसाद पोटाई जी और रघुराज सिंह जैसे मनीषियों का स्मरण करते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि देता हूं। तब के काफ़ी पिछड़े रहे इस क्षेत्र सेदिल्ली पहुंच कर इन विभूतियों ने बाबा साहेब के नेतृत्व मेंसंविधान के बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

साथियों,

आज का दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बनकर चमक रहा है। आज जब हम इस भव्य और आधुनिक विधानसभा भवन का लोकार्पण कर रहे हैंतो ये केवल एक इमारत का समारोह नहींबल्कि 25 वर्षों की जन-आकांक्षाजन-संघर्ष और जन-गौरव का उत्सव बन गया है। आज छत्तीसगढ़ अपने स्वप्न के नए शिखर पर खड़ा है। और इस गौरवशाली क्षण मेंमैं उन महापुरुष को नमन करता हूंजिनकी दूरदृष्टि और करुणा ने इस राज्य की स्थापना की। वो महापुरुष हैं- भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी।

साथियों,

साल 2000 में जब अटल जी ने छत्तीसगढ़ राज्य का गठन कियातो वो निर्णय केवल प्रशासनिक नहीं था। वो निर्णय था विकास की नई राह खोलने काऔर वो निर्णय था छत्तीसगढ़ की आत्मा को पहचान दिलाने का। इसलिएआज जब इस भव्य विधानसभा के साथ-साथ अटल जी की प्रतिमा का भी अनावरण हुआ हैतो मन कह उठता हैमेरे भाव व्यक्त हो रहे हैंअटल जी जहां भी हो- अटल जीदेखिए, आपका सपना साकार हो रहा है। आपका बनाया हुआ छत्तीसगढ़ आज आत्मविश्वास से भरा हैविकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

छत्तीसगढ़ विधानसभा का इतिहास अपने आप में प्रेरणास्रोत है। 2000 में जब इस सुंदर राज्य की स्थापना हुईतो पहली विधानसभा की बैठक राजकुमार कॉलेजरायपुर के जशपुर हॉल में हुई थी। वो समय सीमित संसाधनों का तो थालेकिन असीम सपनों का था। तब केवल एक भावना थी कि हम अपने भाग्य को और तेजी से उज्ज्वल बनाएंगे। बाद में विधानसभा का जो भवन तैयार हुआवो भी पहले किसी दूसरे विभाग का परिसर था। वहीं से छत्तीसगढ़ में लोकतंत्र की यात्रा नई ऊर्जा के साथ प्रारंभ हुई। और आज, 25 वर्षों के बादवही लोकतंत्रवही जनताएक आधुनिकडिजिटल और आत्मनिर्भर विधानसभा के भवन का उद्घाटन कर रही है।

साथियों,

यह भवन लोकतंत्र का तीर्थ स्थल है। इसका हर स्तंभ पारदर्शिता का प्रतीक है। इसका हर गलियारा जवाबदेही की याद दिलाता है। और इसका हर कक्ष जनता की आवाज़ का प्रतिबिंब है। यहाँ लिए गए निर्णय दशकों तक छत्तीसगढ़ के भाग्य को दिशा देंगे। और यहां कहा हर एक शब्दछत्तीसगढ़ के अतीतइसके वर्तमान का और इसके भविष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। मुझे विश्वास हैये भवन आने वाले दशकों के लिए छत्तीसगढ़ की नीतिनियति और नीतिकारों का केंद्र बनेगा।

साथियों,

आज पूरा देश विरासत और विकास को साथ लेकर चल रहा है। और ये भावनासरकार की हर नीतिहर निर्णय में भी दिखती है। आज देश की संसद कोहमारा पवित्र सेंगोल प्रेरणा देता है। नई संसद की नई गैलरियांपूरी दुनिया को भारत के लोकतंत्र की प्राचीनता से जोड़ती हैं। संसद परिसर में लगी प्रतिमाएंपूरे विश्व को ये बताती हैं कि भारत में लोकतंत्र की जड़ कितनी गहरी है।

साथियों,

मुझे प्रसन्नता है कि भारत की यही सोचयही भावनाछत्तीसगढ़ के इस नए विधानसभा में भी झलकती है।

साथियों,

छत्तीसगढ़ का नया विधानसभा परिसर राज्य की समृद्ध संस्कृति का प्रतिबिंब है। इस विधानसभा के कण-कण मेंछत्तीसगढ़ की भूमि पर जन्मे हमारे महापुरुषों की प्रेरणा है। वंचितों को वरीयतासबका साथसबका विकासये भाजपा सरकार के सुशासन की पहचान हैयही देश के संविधान की स्पिरिट हैयहीहमारे महापुरुषोंहमारे ऋषियोंमनीषियों के दिए संस्कार हैं।

साथियों,

मैं जब इस भवन को देख रहा थातो मुझे बस्तर आर्ट की सुंदर झलक दिखाई दी। मुझे याद हैकुछ महीने पहले थाईलैंड के प्रधानमंत्री जी को मैंने यही बस्तर आर्ट भेंट की थीबस्तर की ये कला हमारी सृजनशीलता और सांस्कृतिक शक्ति का प्रतीक है।

साथियों,

इस भवन की दीवारों में बाबा गुरु घासीदास जी का मनखे-मनखे एक समान’ का संदेश हैजो हमेंसबका साथसबका विकाससबका सम्मान सिखाता है। यहां के हर द्वार मेंमाता शबरी की सिखाई आत्मीयता हैजो हमें हर अतिथिहर नागरिक का स्नेह स्वागत करने की बात बताती है। इस सदन की हर कुर्सी में संत कबीर का सिखाया सच्चाई और निडरता का भाव है। और यहां की नींव मेंमहाप्रभु वल्लभाचार्य जी का बताया- नर सेवानारायण सेवा का संकल्प है।

साथियों,

भारत लोकतंत्र की जननी हैमदर ऑफ डेमॉक्रेसी है, हमारा आदिवासी समाज तोपीढ़ियों से लोकतांत्रिक परंपराओं को जीता आया है। मुरिया दरबार- बस्तर की आदिम संसद’ इसका जीवंत उदाहरण है। वो आदिम संसद थीसालों से हमारे यहां समाज और शासन मिलकरसमस्याओं का समाधान करते रहे हैं। और मुझे प्रसन्नता है कि इस विधानसभा में भी मुरिया दरबार की परंपरा को स्थान मिला है।

साथियों,

एक ओरइस सदन के हर कोने मेंहमारे महापुरुषों के आदर्श हैंतो वहीं इसकी अध्यक्ष पीठ पररमन सिंह जी जैसा अनुभवी नेतृत्व भी है।  रमन जीइस बात का बहुत बड़ा उदाहरण हैं कि एक कार्यकर्ता अपने परिश्रम सेअपने समर्पण भाव से लोकतांत्रिक व्यवस्था को कितना सशक्त बना सकता है।

साथियों,

क्रिकेट में तो देखते हैं, कि जो कभी कैप्टन रहता हैवो कभी टीम में खिलाड़ी बनकर के भी खेलता हैलेकिन राजनीति में ऐसा देखने को नहीं मिलता हैये उदाहरण रमण सिंह जी दे सकते हैंकि जो कभी कैप्टन हुआ करते थेवो आज सच्चे स्पिरिट से कार्यकर्ता के छत्तीसगढ़ की सेवा के लिए समर्पित हर कार्यकर्ता के लिए प्रेरणा के रूप में कार्य कर रहे हैं।

साथियों,

राष्ट्रकवि निराला जी ने अपनी कविता में माँ सरस्वती से प्रार्थना की थी- प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव भारत में भर देयह केवल काव्य नहीं थायह आज़ाद भारत के नवसृजन का मंत्र था। उन्होंने नव गतिनव लयनव स्वर की बात कहीयानी कि एक ऐसे भारत कीजो परंपरा से जुड़ा होलेकिन भविष्य की ओर पूरे आत्मविश्वास से आगे बढ़े। आज जब हम छत्तीसगढ़ के नए विधानसभा में खड़े हैंतो यह भावना यहां भी उतनी ही सार्थक है। यह भवन भी उसी नव स्वर’ का प्रतीक हैजहाँ पुराने अनुभवों की ध्वनि हैऔर नए सपनों की ऊर्जा भी है। और इस ऊर्जा के साथहमें एक ऐसे भारत का निर्माण करना हैएक ऐसे छत्तीसगढ़ की नींव बनानी हैजो विरासत से जुड़करविकास के पथ पर आगे बढ़ सके।

साथियों,

नागरिक देवो भव:ये हमारे सुशासन का मंत्र है। और इसीलिएहमें विधानसभा के हर निर्णय में जनता के हित को ध्यान में रखकर काम करना होगा। यहां कानून ऐसे बनेंजो रिफॉर्म को गति देजिससे लोगों का जीवन आसान होजो लोगों के जीवन से सरकार के अनावश्यक दखल को बाहर करे। सरकार का न अभाव हो और न ही अनावश्यक प्रभाव होयही तेज़ प्रगति का एकमात्र मंत्र है।

साथियों,

यह हमारा छत्तीसगढ़ तो भगवान श्रीराम का ननिहाल है। भगवान श्रीराम इस धरती के भांजे हैं। आज इस नए परिसर में श्रीराम के आदर्शों को याद करने का इससे बेहतर दिन और क्या होगा। भगवान राम के आदर्शहमें सुशासन की सीख देते हैं।

साथियों,

अयोध्या में राममंदिर की प्राणप्रतिष्ठा के समयहम सभी ने देव से देश और राम से राष्ट्र’ का संकल्प लिया था। हमें याद रखना हैराम से राष्ट्र का अर्थ है- रामराज बैठे त्रैलोका। हरषित भए गए सब सोका। इसका अर्थ हैसुशासन और जनकल्याण का राज! इसका अर्थ हैसबका साथसबका विकास की भावना से शासन! राम से राष्ट्र का अर्थ है, नहिं दरिद्र कोउदुखी न दीना। जहां कोई ना गरीब होना कोई दुखी होजहां भारत गरीबी से मुक्त होकर आगे बढ़ेराम से राष्ट्र का अर्थ है- अल्पमृत्यु नहिं कवनिउ पीरा। यानीबीमारियों से असमय मृत्यु ना होयानी स्वस्थ और सुखी भारत का निर्माण होराम से राष्ट्र का मतलब है- मानउँ एक भगति कर नाता। अर्थात हमारा समाज ऊंच नीच के भाव से मुक्त होऔर हर समाज में सामाजिक न्याय की स्थापना ह

साथियों,

राम से राष्ट्र का एक अर्थ ये भी है कि, “निसिचर हीन करउँ महि भुज उठाइ पन कीन्ह। यानीमानवता विरोधी ताकतों काआतंक के विनाश की प्रतिज्ञा! और यही तो हमने ऑपरेशन सिंदूर में देखा है। भारतआतंक के विनाश की प्रतिज्ञा करके आतंकियों की कमर तोड़ रहा है। भारत आज नक्सलवादमाओवादी आतंक को भी समाप्त करने की तरफ बढ़ रहा है। भारत आज अभूतपूर्व विजय के गर्व से भरा हुआ है। और गर्व की यही भावनाआज छत्तीसगढ़ विधानसभा के इस नए परिसर में हमें चारों तरफ दिख रही है।

साथियों,

पिछले पच्चीस वर्षों में छत्तीसगढ़ ने जो परिवर्तन देखा हैवह अद्भुत और प्रेरणादायी है। कभी यह राज्य नक्सलवाद और पिछड़ेपन से पहचाना जाता था। आज वही राज्य समृद्धिसुरक्षा और स्थायित्व का प्रतीक बन रहा है। आज बस्तर ओलंपिक की चर्चा देश के कोने-कोने में है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आज विकास की लहर और सुकून की मुस्कान लौट आई है। और इस परिवर्तन के पीछे है छत्तीसगढ़ की जनता का परिश्रम और भाजपा सरकारों का दूरदर्शी नेतृत्व।

साथियों,

छत्तीसगढ़ के रजत जयंती समारोह का उत्सवअब एक बड़े लक्ष्य का आरंभ बिंदु बनने जा रहा है। 2047 तकजब भारत अपनी आजादी के 100 साल मनाएगाहमें विकसित भारत निर्माण के जो लक्ष्य तय किए हैंउसमें छत्तीसगढ़ की भूमिका बहुत बड़ी होने वाली है। और इसीलिएमैं यहां उपस्थित सभी साथियों से भी कहूंगासभी जनप्रतिनिधियों से कहूंगाकि आप एक ऐसी व्यवस्था का निर्माण करिएएक ऐसी विधानसभा का उदाहरण बनाइएजो विकसित भारत के हर राज्य को कुछ नया करने के लिए प्रेरित करे। यहां होने वाले संवादों मेंयहां पूछे जाने वाले प्रश्नों मेंसदन में होने वाली कार्यवाहियों मेंसब में एक श्रेष्ठता लाने का प्रयास होऔर हम जो भी करेंजिस भी रूप में करेंसबका लक्ष्य विकसित छत्तीसगढविकसित भारत का निर्माण हो।

साथियों,

छत्तीसगढ़ की इस नई विधानसभा की श्रेष्ठता इसके भवन की भव्यता से ज्यादायहां लिए जाने वाले जनकल्याण के निर्णयों से निर्धारित होगी। यह इस बात से तय होगी कि यह सदन छत्तीसगढ़ के सपनों कोइसकी सो