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गोल्ड रपट

बालकों के फैलते प्रदूषण से लाखों बच्चे को सांस लेने मैं भारी दिक्कत हो रही है मंत्रियों की कंपनियां राखड़ ढोने में लगी

कोरबा--संवाददाता 

****** बालकों के खाने के दांत अलग और दिखाने के दांत अलग-अलग\बालको मैनेजमेंट से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर किस मंत्री की कितनी गाड़ियां चल रही है का खुलासा किया जाएगा *****

बालको नगर///   जब से वेदांता ग्रुप ने   बालकों में  51% हिस्सेदारी हासिल की हैतब से वह अपनी मनमानियां करते आ रहा है 51 हिस्सेदारी का मतलब है कि सारा मैनेजमेंट उसके पास आ गया हे जैसे ही बालकों के  हाथ में मैनेजमेंट आया और  आने के बाद मनमानी करना शुरू कर दिया जैसा कि निजी कंपनियों में होता है पूरे प्लांट को ठेका पद्धति में अलग-अलग हिस्सों में बताकर काम दे दिया है इस काम को करने के लिए 15 से 20 कंपनियां बालकों के अंदर काम कर रही  हैं इनमें कुछ रसूखदार मंत्रियों की कंपनियां है कुछ रसूखदार बालकों के अधिकारियों की कंपनियां हें जो खुलेआम मजदूरों का शोषण करती हैं और बालकों के खातों से अच्छा खासा पैसा वसूलरही हें  ठेका प्रथा होने के कारण मजदूरों को  उनका वैधानिक हक नहीं मिल रहा है  ठेका प्रथा के चक्कर में उन्हें वैधानिक सुविधा देने के लिए बालको भी मजबूर नहीं है यह खेल है 51% के  आने के बाद आने के बाद से शुरू हुआ है 

बालको (BALCO) कोरबा के 10 किलोमीटर के दायरे में लगभग 15 से 20 छोटे-बड़े ग्रामीण और शहरी क्षेत्र/गांव स्थित हैं। इनमें राजगामरभदरापराऔर रुकबहरी जैसे गांव शामिल हैं

राजगामर (Rajgamar): बालको के पास स्थित एक प्रमुख क्षेत्र/गांव।रुकबहरी (Rukbahri): बालको राखड़ डैम के पास स्थित प्रभावित गांव। भदरापरा (Bhadrapara): बालको क्षेत्र से सटा हुआ इलाका इस 10 किलोमीटर के इलाके में करीब लाख से ऊपर रहवासी रहते हैं जिनमें  1 वर्ष से लेकर 18 वर्ष के बच्चों को सांस लेने में भारी दिक्कत हो रहे हैं फेफड़ों की बीमारी से ग्रसित यह नागरिक खसते रहते हैं यही हालत महिलाओं की है और बुजुर्गों की सांस लेने में तकलीफ का मतलब है की बालको इतना प्रदूषण फैला रहा है इन लाखों  का जीवन जीने लायक नहीं

रुक बाहरी गांव के लोगों का तो कहना है कि हमें ऐसा लगता है कि हम राखड़ के अंदर ही रह रहे बालको कोई ध्यान नहीं देता है  धूल उड़ती रहती है और हम उसी में सांस ले रहे हैं हमारे बच्चे लगातार खांसी आने से स्वस्थ नहीं है बीमार जैसी स्थिति है बस वह चलती फिरती लाश की तरह हें  बालकों को इसलिए इसमें कोई फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि उन्होंने रसूखदार  मंत्री विधायक जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों को अपने कंधों पर बिठा रखा मंत्रियों को रखड़ डैम के ट्रांसपोर्ट की मलाई चाटने से फुर्सत नहीं है इन गांवों के बच्चे मारें अध् मरे  रहे इसेसे  उनको कोई लेना देना उनके ट्रक बालकों के राखड़ उठाने मे व्यस्त हें 

एयर पॉल्यूशन के आंकड़ों में बालकों ने अपने आंकड़े अलग जारी किए हैं और छत्तीसगढ़ शासन प्रदूषण मंडल में अपने आंकड़े अलग जारी कीये हुए हें  दोनों के आंकड़ों में करीब 60% का अंतर है जिसे छुपाया जाता है उसके पीछे जो कारण है उनमें ऐसी कंपनियां वहां पर राखड़ उठाने में लगी है इनका सीधा संबंध छत्तीसगढ़ के मंत्रियों से है विधायकों से है इसलिए प्रदूषण मंडल के अधिकारी वहां इस उठाते हुए धुएं को देखते हुए भी मोन बैठे रहते हैं और जनता की आवाज सुनने वाला कोई नहीं अगले अंक में बालको मैनेजमेंट से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर किस मंत्री की कितनी गाड़ियां चल रही है का खुलासा किया जाएगा