जायज मांगों को लेकर बालको को चेतावनी मागें नहीं मने तो हल्ला बोल
"बालको उत्सव वाटिका में अहम रणनीतिक बैठक,3 सितंबर को रोजगार अधिकार रैली निकालने का निर्णय।
**** उद्योग स्थानीय नागरिकों सरकारी नियमों के तहत वादा करते हैं लेकिन जब निभाने की बात आती है उनका H R डिपार्टमेंट तरह-तरह के ऐसे नियम बताता है किया उमीदवार इसके लायक नहीं है यह उसके लायक नहीं है उसके सर्टिफिकेट में यह कमी है जबकि सरकार के नियमों के अनुसार स्थानीय युवकों को कारखाने में काम करने के लायक बनाने की जिम्मेदारी भी उद्योग मैनेजमेंट की होती है वह यह ना करके सीधे-सीधे ठेका प्रथा का सहारा लेकर अपना प्रोडक्शन करते रहते हैं ठेका प्रथा एक ऐसा नाशुर है स्थानीय बेरोजगारों के लिए कि इसकी आड़ में जहां उद्योग मैनेजमेंट तमाम जिम्मेदारियां से मुक्त हो जाता है जो कि संविधान नियमों के तहत गलत है इस विषय पर स्थानीय जिला प्रशासन को शक्ति से काम लेते हुए श्रम मंत्रालय के तहत आने वाले तमाम अधिकारियों को सचेत कर उद्योगों में स्थानीय नागरिकों को रोजगार दिलाने की नैतिक जिम्मेदारी है जिससे वह भी भूल गए हैं इसलिए आज कल उद्योगों में लगातार नागरिक अपनी मांगों को लेकर रेलियाँ नीलक गुड बाय गुड नाइटअपने हक़ का बिरोध करते हेह इसकी जरूरत नहीं है यह काम आराम से हो जाना चाहिए ***
बालको 31—08—2026////बालको की उत्सव वाटिका में स्थानीय युवाओं, महिलाओं और नागरिकों की उपस्थिति में रोजगार, जनसुविधा और विकास से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में सर्वसम्मति से तय हुआ कि 3 सितंबर को दोपहर 3 बजे, सेक्टर-5 स्थित धन सिंह जी की प्रतिमा से लेकर बालको परसाभाटा गेट तक रोजगार अधिकार रैली निकाली जाएगी। इसके बाद बालको प्रबंधन को मांगपत्र सौंपा जाएगा। बैठक में यह भी चेतावनी दी गई कि यदि स्थानीय युवाओं और महिलाओं को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो आंदोलन को और व्यापक और उग्र किया जाएगा। मांगपत्र में मुख्य मांगें शामिल हैं...
स्थानीयों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार, महिलाओं को विशेष अवसर, युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के मौके, बाहरी भर्ती पर रोक, बिजली-पानी की बेहतर व्यवस्था, सीएसआर के तहत महिलाओं के लिये प्रभावी योजनाएँ, और क्षेत्र के समग्र विकास से जुड़े मुद्दों का शीघ्र समाधान। प्रतिभागियों ने बालको प्रबंधन से अपील की वे इन मांगों पर गंभीरता से विचार करें, अन्यथा जनता अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य होगी।बैठक में विभिन्न वार्डों से आए महिला-पुरुष और युवाओं के साथ जन अधिकार समिति के संस्थापक विकास डालमिया, अध्यक्ष सुनील सुना, कोरबा पर्यावरण विकास समिति के सचिव अजय कुमार, पूर्व बसपा जिला प्रभारी बसंत दिक्सेना, पूर्व पार्षद बांदेकर मैडम, हम होंगे कामयाब महिला शक्ति से कलंद्रि परिहार, ह़ीरा मैत्री, शुभा जी, कोरबा चेतना विकास समिति की अध्यक्ष विमला बंदे एवं कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। प्रतिभागियों ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को उग्र किया जाएगा।


