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गोल्ड रपट

ब्रिक्स सम्मेलन में बजा भारत की शक्ति का डंका

नरेन्द्र कुमार वर्मा-

नई दिल्ली ब्यूरोचीफ

नई दिल्ली 12//09//2026//////  भारत मंड़पम में आयोजित होने वाले 18 वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के जरिए भारत ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को नया आयाम दिया। नई दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन अपनी थीम बिल्डिंग फॉर रेजिलेंसइनोवेशनकॉर्पोरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी पर केंद्रीत है। इन्हीं बिंदुओं पर भारत ने अपनी कूटनीति को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाया। ब्रिक्स देशों में 11 फुल टाइम मेंबर्स हैं जबकि 10 पार्ट टाइम मेंबर्स हैं। स्थायी सदस्य देशों में ब्राजील, चीनमिस्रइथियोपियाभारतइंडोनेशियाईरान, रूससऊदी अरबदक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल है। साथ ही बेलारूसबोलीवियाकजाकिस्तानक्यूबामलेशियानाइजीरियाथाईलैंडयुगांडाउज्बेकिस्तान और वियतनाम ब्रिक्स के पार्ट टाइम सदस्य हैं। 

नई दिल्ली में इकठ्ठा हुए ब्रिक्स देशों ने विकास की नई परिभाषा तय की और आपसी हितों के बहुत सारे समझौतों पर सहमति दिखाई। भारत की सफलता को इस बात से देख जा सकता है कि वैश्विक व्यापार में डॉलर के बोल-बाले के बावजूद अधिकांश देशों ने यूपीआई के माध्यम से व्यापार करने पर सहमति जताई। 

नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स  शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता भारत ने की। सम्मेलन में राजनीतिअर्थव्यवस्थासुरक्षा और विकास से जुड़े कई अहम वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। भारत ने 1 जनवरी 2026 को ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी। यह चौथी बार है जब भारत को इस अंतरराष्ट्रीय समूह की अध्यक्षता करने की जिम्मेदारी मिली है। साल 2012, 2016 और 2021 में भी भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। 

नई दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन की थीम का अगर बात करें तो लचीलापन यानी रेजिजियंसनवाचार यानी इनोवेशनसहयोग यानी कोऑपरेशन और निरंतरता यानी सस्टेनेबिलिटी के साथ सभी सदस्य देशों ने मिलकर चलने की बात कही है। भारत ने सभी सदस्य देशों से अपील की है कि छोटे और मध्यम उद्योग धंधोंविज्ञान और तकनीकीशोध, साइबर सुरक्षाआतंकवाद से निपटनेडिडिटल लेने-देनआर्टिफिशियल इंटेलिजेंसग्रीन एवं क्लीन एनर्जीजलवायु परिवर्तनपर्यावरण सुरक्षा जैसे विषयों पर सभी मिलकर काम करेंगे। कृषि विकासखाद्य सुरक्षा ऊर्जा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मिलकर आगे बढ़ने का निर्णय लिया गया। 

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में भविष्य का जो रोडमैप तैयार हुआ उसके दूरगामी परिणाम होंगे और सभी देशों को उसका व्यापक लाभ मिलेगा। भारत के प्रयास के बाद विकासशील और गरीब देशों यानी ग्लोबल साउथ की जरूरतों और प्राथमिकताओं को ब्रिक्स के मुख्य एजेंडे में जगह मिली। 

ब्रिक्स के साथ जन भागीदारी यानी एक दूसरे देश के साथ वहां के लोगों के सीधे जुड़ाव के लिए भी भारत ने ब्रिक्स सॉलिडेरिटी रनफिल्म फेस्टिवलब्रिक्स बाजार और क्विज जैसी प्रतियोगितायों को व्यापक स्तर पर आयोजित करने पर जोर दिया। भारत का मानना है कि इस तरह के वैश्विक कार्यक्रमों के जरिए युवाओंशोधकर्ताओंसांस्कृतिक संस्थाओं और स्टार्टअप्स को भी इस बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच से सीधे जोड़ कर तरक्की का नया रास्ता खोला जा सकता है। 

भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस बड़े सम्मेलन से भारत के बाजारव्यापार जगत और घरेलू उद्योगों को बहुत बड़ी उम्मीदें जगी है। भारतीय कंपनियों का कहना हैं कि बातचीत से आगे बढ़कर व्यापार का आसान रास्तासस्ता और सुगम सिंगल विंडो सिस्टम बनाने के लिए बड़े निर्णय लिए जाए। नई दिल्ली में जब ब्रिक्स सम्मेलन हो रहा है तब पूरी दुनिया में व्यापारिक और राजनीतिक उथल-पुथल मची है। खासतौर पर रूस यूक्रेन युद्ध और ईरान अमेरिका की लड़ाई का असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर देख जा रहा है। 

ऐसे वक्त में ब्रिक्स देशों का व्यापार बाधा समाधान और अन्य विषयों पर बात करना अहम माना जा रहा है। लिहाजा आपसी व्यापार के रास्ते में आने वाली रुकावटों को दूर करनाव्यावहारिक और व्यावसायिक फैसले लेनाकस्टम क्लियरेंसगैर-टैरिफ बाधाओं को कम करनामानकों की स्थापना करनाव्यापारिक असंतुलन को ठीक करनावैल्यू एवं सप्लाई चेन बनाना जैसे विषयों पर भी सदस्य देशों ने मंथन किया। भारतीय कारोबारियों का कहना है यह प्रयास भारत के व्यापार को वैश्विक स्तर पर बढ़ाने का काम करेगा। भारत सरकार चाहती है ब्रिक्स केवल राजनीतिक और कूटनीतिक मंच न रहे बल्कि व्यापार और आर्थिक मुनाफे का बड़ा मंच बन कर दुनिया को राह दिखाए। नई दिल्ली शिखर सम्मेलन की सफलता यह तय करेगी। 

दरअसल साल में सबसे पहले ब्रिक शब्द का प्रयोग अमेरिका के अर्थशास्त्री जिम ओनील ने ब्राजीलरूसइंडिया और चीन के लिए किया था। बाद में जब इसका स्वरूप बना तो यह ब्रिक से ब्रिक्स बन गया और दुनिया के कई देश भी इसका हिस्सा बनते गए। भारत की अध्यक्षता में वैश्विक शासनबहुपक्षवादव्यापारतकनीकऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास पर चर्चा हुई। 

सम्मेलन के पहले सत्र नें इन्क्लूसिव ग्लोबल गवर्नेंस एंड स्ट्रेंथनिंग मल्टीलैटरलिज्म यानी वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाने और बहुपक्षवाद को मजबूत करने पर चर्चा की गई। ब्रिक्स सदस्य देशों ने भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। भारत मंडपम के बाहरी लॉन में सामूहिक तस्वीर खिंचवाने के बाद सभी नेताओं ने भारत मंड़पम के लॉन में संयुक्त रूप से पौधारोपण भी किया। भारत ने इस दौरान अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की थी दिल्ली में सुरक्षायातायात, होटलएयरपोर्ट और विदेशी नेताओं की आवाजाही के लिए करीब 30 हजार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया। हवाई अड्डे से लेकर विदेशी नेताओं के ठहरने वाले 11  प्रमुख होटलों और भारत मंडपम के आसपास सुरक्षा बेहद कड़ी रही। एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए गए हैं और विदेशी नेताओं की सुरक्षित आवाजाही के लिए विशेष रूट तैयार किए गए। 

ब्रिक्स सम्मेलन के जरिए भारत ग्लोबल साउथ में अपनी भूमिका मजबूत करने में जुटा है। भारत व्यापारनिवेशऊर्जा और कूटनीतिक सहयोग के साथ विकासशील देशों की अधिक भागीदारी की बात को इस मंच से मजबूती से उठाने में कामयाब रहा। भारत का पहला लक्ष्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक और वित्तीय सहयोग बढ़ाने के साथ ही अपने व्यापारनिवेशविकास और वित्तीय लेने पर केंद्रीत रहा है। भारत ने नई दिल्ली सम्मेलन के माध्यम से वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक रूप से जुड़े मामलों पर बातचीत और सहयोग मजबूत करने का काम किया।