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गोल्ड रपट

मुख्यमंत्री आपकी कहानी एक सच्चे भूमिपुत्र की कहानी है >>> गौतम अदाणी

नमस्कार,

कोलकाता को मेरा प्रणाम,

बंगाल की धरती को मेरा प्रणाम,

कोलकाता //24 सितंबर 2026,////  कोलकाता, पश्चिम बंगालपश्चिम बंगाल के माननीय मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी जी,सरकार के सम्मानित सदस्यगण,सम्मानित डॉक्टर और चिकित्सा जगत से जुड़े सभी सदस्य,इंडस्ट्री के लीडर्स और मेरे प्यारे मित्रों, आज यहाँ खड़ा होना मेरे लिए सम्मान की बात है। यह वही जगह है, जो आने वाले समय में कई पीढ़ियों के लिए स्वास्थ्य, उम्मीद और इंसानी गरिमा से जुड़ी एक संस्था बनेगी।

मैं पश्चिम बंगाल के माननीय मुख्यमंत्री श्री सुवेंदु अधिकारी जी का इस सभा में उपस्थित होने के लिए आभार व्यक्त करता हूँ।आज सुबह मैं कालीघाट गया और माँ से प्रार्थना की। मैंने माँ से शक्ति माँगी, ताकि साहस के साथ नेतृत्व कर सकूँ; इच्छाशक्ति माँगी, ताकि बड़े सपने देखने की हिम्मत रख सकूँ; और क्रियाशक्ति माँगी, ताकि बिना डरे उन सपनों को पूरा कर सकूँ। वहाँ से लौटते समय मेरे मन में एक बात थी: बड़े अवसर बड़ी जिम्मेदारी की माँग करते हैं!

 बंगाल आज ऐसे ही एक दौर से गुजर रहा है। और इस समय सबसे आगे एक ऐसे नेता हैं, जिन्हें इन संभावनाओं को प्रगति में बदलने की जिम्मेदारी मिली है। सुवेंदु अधिकारी जी!

 माननीय मुख्यमंत्री जी, आपकी कहानी एक सच्चे भूमिपुत्र की कहानी है। एक ऐसे बेटे की, जिससे इस राज्य के लोगों को नौकरियों, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य और नए अवसरों को लेकर बहुत उम्मीदें हैं।

 आपके नेतृत्व में मुझे पूरा भरोसा है कि बंगाल आने वाली संभावनाओं को नई दिशा देगा। और अदाणी में हम इन संभावनाओं को आगे बढ़ाने में अपना योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

 मेरे प्यारे दोस्तों, यह वह धरती है, जिसने पीढ़ी दर पीढ़ी ऐसे विचारों, संस्थानों और लोगों को जन्म दिया है, जिन्होंने भारत को आकार देने में बड़ी भूमिका निभाई है।

 यह रवींद्रनाथ टैगोर, स्वामी विवेकानंद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और जगदीश चंद्र बोस की धरती है। यह वह धरती है, जिसके विचारों, साहस, विज्ञान और संस्कृति ने हमारे देश की दिशा तय करने में मदद की है।

 इसका इतिहास बहुत बड़ा है। इसकी प्रतिभा बहुत बड़ी है। और आज भारत एक बार फिर उम्मीद के साथ पूर्व की ओर देख रहा है कि बंगाल अपनी ताकत को फिर से मजबूत करेगा और अपने अगले बड़े अध्याय की शुरुआत करेगा।

 अदाणी में हम बंगाल के लोगों के साथ मिलकर इस नए अध्याय को बनाने में योगदान देना चाहते हैं। और आज हमारी यह प्रतिबद्धता अदाणी आरोग्य मंदिर से शुरू हो रही है।

 अदाणी आरोग्य मंदिर एक विश्वस्तरीय, गैर-लाभकारी चिकित्सा संस्था होगी, जिसमें 2,000 बेड होंगे। इनमें से 1,000 बेड समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए होंगे, जो राज्य और केंद्र की स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के तहत पात्र हैं।

 इस संस्था के केंद्र में एक मेडिकल कॉलेज होगा, जिसे आधुनिक रिसर्च और इलाज की सुविधाओं का सहयोग मिलेगा। इससे बंगाल के लिए बेहतर और कुशल स्वास्थ्यकर्मियों की मजबूत नींव तैयार होगी हम अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और रिसर्च सुविधाओं पर 4,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश करेंगे इस संस्था से राज्य के हेल्थकेयर इकोसिस्टम में 10,000 से ज्यादा नौकरियों के अवसर मिलने की उम्मीद है।

 हालांकि, एक मजबूत बंगाल का निर्माण किसी एक संस्था तक सीमित नहीं होना चाहिए। स्वास्थ्य सेवाएं लोगों के जीवन को बेहतर बना सकती हैं, वहीं मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर लाखों लोगों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है।

 और यहीं से बंगाल के प्रति हमारी व्यापक प्रतिबद्धता की शुरुआत होती है।

 अदाणी समूह में इंफ्रास्ट्रक्चर हमारे काम के केंद्र में है। और भारत में बंगाल जैसी भौगोलिक स्थिति, प्रतिभा और आर्थिक संभावनाओं का अनोखा मेल कहीं और नहीं मिलता। बंगाल भारत के विशाल औद्योगिक क्षेत्र और पूर्वोत्तर को बंगाल की खाड़ी से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण समुद्री और लॉजिस्टिक्स केंद्र है। साथ ही, दक्षिण-पूर्व एशिया और उससे आगे के देशों के साथ समुद्री व्यापार के रास्तों से जुड़ने के लिए भी बंगाल की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है।

 यह बंगाल को एक ऐसी खास बढ़त देता है, जिसका मुकाबला बहुत कम क्षेत्र कर सकते हैं। बंगाल में केवल प्रवेश द्वार बनने की ही नहीं, बल्कि एशिया के सबसे बड़े एकीकृत औद्योगिक और आर्थिक केंद्रों में से एक बनने की भी क्षमता है।और जब यह पूरा तंत्र आपस में जुड़ता और विस्तार करता है, तो बंगाल और उसके आसपास एक बड़ा बदलाव आता है। पोर्ट मजबूत होते हैं, तो लॉजिस्टिक्स बेहतर होता है। बेहतर लॉजिस्टिक्स उद्योगों को आकर्षित करता है। उद्योगों से मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलता है। मैन्युफैक्चरिंग के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है। ऊर्जा से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होता है और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भविष्य के नए उद्योगों को आकर्षित करता है।

 और सबसे महत्वपूर्ण बात, इससे रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ते हैं।

 इसी विश्वास के साथ, हम 2035 तक बंगाल में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने की उम्मीद रखते हैं। यह निवेश पोर्ट, लॉजिस्टिक्स, बिजली उत्पादन, बिजली के ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन, सड़क, पुल और रोपवे, ग्रीन सीमेंट तथा हाइपरस्केल डेटा सेंटर जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किया जाएगा।

 हालांकि, प्रगति को केवल सड़कों की लंबाई, बिजली उत्पादन की क्षमता या निवेश की रकम से नहीं मापा जा सकता। एक समाज को अपने लोगों की भी चिंता करनी चाहिए और उसकी संस्कृति, विरासत और उन संस्थाओं की रक्षा करनी चाहिए, जो उसे अपनी पहचान देती हैं।

 और बंगाल की पहचान बेहद अनमोल है। इसके घाट, इसका आर्किटेक्चर, इसकी कला, इसका साहित्य और इसके त्योहार, ये सब बंगाल के विकास से अलग नहीं हैं। बल्कि यही वे चीजें हैं, जो बंगाल को और बेहतर बनाने के हमारे प्रयास को खास और महत्वपूर्ण बनाती हैं।

 और इसलिए, अपनी औद्योगिक और स्वास्थ्य संबंधी पहलों के साथ-साथ, हम ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग के पुनरुद्धार, कुमारटुली घाट के कायाकल्प और कोलकाता की दुर्गा पूजा की कला और परंपरा को दुनिया के सामने लाने वाली पहलों का भी समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

 तीन दशक पहले, गुजरात में मुंद्रा स्थित हमारा पोर्ट पश्चिम भारत में हमारी पहली कर्मभूमि बना। आज सुबह, जब मैंने कालीघाट में मां के दर्शन और पूजा की, तो मैंने उनसे आशीर्वाद मांगा कि बंगाल पूर्वी भारत में हमारी दूसरी कर्मभूमि बने। क्योंकि मेरे लिए बंगाल केवल निवेश करने की जगह नहीं है। यह वह जगह है, जहां मैं निर्माण करना, सेवा करना और सबसे बढ़कर, इस मिट्टी का हिस्सा बनना चाहता हूं।

 जिस माटी ने 'वंदे मातरम्' से सोए भारत का स्वाभिमान जगाया,

जिसने विवेकानंद, नेताजी और टागोर का अमर तेज चमकाया,

उसी पावन धरती को अब अपनी ताकत का जलवा फिर दोहराना है,

ज्ञान, कला और क्रांति की शक्ति से भारत का भविष्य सजाना है।

બાંગ્લા જાગબે, બાંગ્લા એગોબે

બાંગ્લાર શોકતી, ભારોતેર ગોતિ